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Famous person Art and Bollywood T-Series गुलशन कुमार दुआ कैसे एक फल विक्रेता से शुरुआत करके भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी के मालिक बन गए

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गुलशन कुमार को इस दुनिया से गए हुए काफी साल हो चुके हैं. मगर आज भी उनका जीवन कई लोगों के लिए प्रेरणा जनक है. कहा जाता है कि मेहनत के दम पर कोई भी इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है

T-Series यूट्यूब चैनल स्वीडिश यूट्यूबर पीयूडीपाई चैनल को पछाड़कर दुनिया के नंबर 1 यूट्यूब चैनल बन गया है

टी सीरीज आज के समय में T-series का नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा। इसके बारे में अधिकतर वह लोग जानते होंगे जिन लोगों को गाने सुनने का शौक हैं। T-Series यूट्यूब पर बहुत ही फेमस 29 चॅनेल भी हैं जिसके बहुत ही अधिक 300 मिलेनियम से ज्यादा सब्सक्राइबर्स भी हैं। जो की पूरे विश्व में सबसे अधिक भी माने जाते हैं आज तक किसी के भी यूट्यूब पर इतने subscriber नहीं हैं। तो क्या आप जानते हो की T-Series की शुरुआत कब और किसके द्वारा की गयी थी T-Series भारत की ही एक म्यूजिक कंपनी है जो की गानों को कंपोज़ भी करती है यह कंपनी केवल गानों को ही नहीं बल्कि T-Series कंपनी बहुत सी फिल्मों को बनाने और डिस्ट्रीब्यूट करने का भी कार्य करती हैं। भारत में जितने भी टॉप के गाने जो की लोगो को बहुत अधिक पसंद आते हैं उन सभी गानों में से ज्यादातर को T-Series द्वारा ही बनाया गया होता हैं और उन सभी गानों को रिलीज़ करना भी इसी कंपनी का कार्य होता हैं।

T-Series के भारत की ज्यादातर भाषाओँ में यूट्यूब चैनल हैं

जैसा की हमने आपको बताया हैं की टी-सीरीज कंपनी केवल हिंदी भाषा में ही नहीं बल्कि यह कंपनी बहुत सी भाषाओ में भी गाने बनती हैं जैसे की – पंजाबी गाने,तेलुगु गाने,भोजपुरी गाने,हिंदी गाने आदि। यह कंपनी यूट्यूब पर भी अपने गानों को अपलोड करती हैं इनका यूट्यूब पर चैनल भी हैं जिसके बहुत ही अधिक subscribers हैं।

T-Series की स्थापना कब और किसके द्वारा हुई थी

T-series कंपनी भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी की स्थापना 11 जुलाई 1983 को गुलशन कुमार दुआ जी के द्वारा दिल्ली में की गई थी , गुलशन कुमार दुआ एक पंजाबी खत्री परिवार में पैदा हुए , पिता दिल्ली के दरियागंज में एक फल विक्रेता थे। गुलशन कुमार ने अपने पिता के साथ फल विक्रेता के रूप में भी कार्य किया है। उन्होंने ऑडियो कैसेट, अगरबत्ती, बोतलबंद पानी, डिटर्जेंट और छत के पंखों का भी कारोबार शुरू किया। गुलशन कुमार अपनी जिंदगी में कुछ अलग करना चाहते थे और कुछ नया करने के जोश के चलते उन्होंने दिल्ली में गानों की सस्ते कैसेट बेचना शुरू किया. उनका कैसेट बचने का काम खूब चलने लगा. जिसके बाद उन्होंने अपने काम को ओर बढ़ाया और दिल्ली से सटे नोएडा में अपनी एक कंपनी खोली. गुलशन कुमार द्वारा इस कंपनी में बहुत ही इकनॉमिकल कीमत पर गानों के ऑडियो कैसेट बनाए जाते थे. जिसके चलते उनका ये काम खूब चल पड़ा. 23 साल की आयु में उन्होंने “सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज के नाम से कम्पनी शुरू की , जल्दी ही कामयाब होने के बाद उन्होंने अपनी कंपनी को मुंबई में शिफ्ट कर दिया और इसका नाम बदलकर टी- सीरीज कर दिया. मुंबई में आने के बाद गुलशन कुमार का काम और चल गया. जिसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी अपना व्यापार शुरू कर दिया और साल 1989 में उन्होंने ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ नाम से एक फिल्म बनाई. इस फिल्म को तो लोगों ने खास पसंद नहीं किया लेकिन इस फिल्म के गाने खूब चले. इस फिल्म के अलावा उन्होंने ‘आशिकी’, ‘जीना तेरी गली में’ और ‘दिल है की मानता नहीं’ जैसी फिल्म बनाई. आशिकी और दिल है की मानता नहीं फिल्म के गाने काफी हिट हुए थे और लोगों द्वारा काफी पसंद किए गए थे.T-Series द्वारा बनायीं उस फिल्म की एक एल्बम की उस समय करीब 20 मिलियन कॉपी बेचीं गयी थी जो की बहुत अधिक थी। वहीं आज टी-सीरीज कंपनी ने एक नई बुलंदिया छू रखी हैं और इस कंपनी द्वारा आज कई संगीत और फिल्में बनाई जाती हैं. गुलशन जी ने ही फिल्मों में नदीम-श्रवण, कुमार सानू, अनुराधा पोढ़वाल और सोनू निगम को ब्रेक दिया था। म्यूजिक कंपनी से बने देश के शीर्ष करदाता T -series भारतीय संगीत बाजार के लगभग 60% से अधिक हिस्से में फैला हुआ है और छह महाद्वीपों के 24 से ज्यादा देशों में संगीत का निर्यात करता है। गुलशन जी ने माता वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो तीर्थयात्रियों के लिए नि – शुल्क भोजन उपलब्ध कराता है। गुलशन वित्तीय सन 1992-93 में देश के शीर्ष करदाता थे।

गुलशन कुमार की हत्या , जिसको फिल्मों में मौका दिया उसने ही हत्या करवाई

सन् 1997 की सुबह जब गुलशन रोजाना की तरह शिव जी के मंदिर में उनकी पूजा करने गए थे, उस वक्त उनकी हत्या कर दी थी. कहा जाता है कि गुलशन कुमार को लंबे समय से अंडर वर्ल्ड से धमकी भरे फोन आ रहे थे. जिनके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या के मामले में पुलिस द्वारा कई लोगों को पकड़ा गया और इस वक्त अब्दुल रऊफ नामक एक शख्स उनकी हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. रऊफ का नाता दाऊद से बताया जाता है.संगीतकार नदीम श्रवण की जोड़ी से नदीम अख़्तर सैफ़ी को गुलशन कुमार की हत्या में संलिप्त पाया गया। नदीम ने ही हत्यारों को गुलशन कुमार की हत्या की सुपारी दी थी, फिर देश से भाग गया