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Famous person Art and Bollywood अमृतसर की पवित्र धरती से बहुत कलाकार निकले हैं , नरेंद्र चंचल भी अमृतसर में पैदा हुए और पूरी दुनिया में छा गए

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नरेंद्र चंचल Narendra Chanchal, जन्म- 16 अक्टूबर, 1940, अमृतसर, पंजाब; मृत्यु- 22 जनवरी, 2021, दिल्ली) भले ही उनका नाम नरेंद्र चंचल उनकी शरारतों की वजह से रख गया हो मगर उनका असली नाम नरेंद्र खरबंदा था. नरेंद्र चंचल भारत के प्रसिद्ध गायकों में से एक थे। मुख्य रूप से वे माता के भजन गाते थे । लेकिन नरेंद्र चंचल ने बहुत-से हिंदी फिल्म गीत भी गाए थे। उनके गीत के बिना हर दुर्गा पूजा अधूरी होती थी। माता के भक्तों में नरेंद्र चंचल की लोकप्रियता बहुत ज्यादा थी , वहीं, राजेश खन्ना और शबाना आज़मी अभिनीत फिल्म 'अवतार' में महेंद्र कपूर और आशा भोंसले के साथ नरेंद्र चंचल का गाया गीत 'चलो बुलाया आया है माता ने बुलाया है' माता की बेहद प्रसिद्ध भेंटों में शु्मार है। इस भेंट ने चंचल को लोगों के दिलों में बैठा दिया

परिचय

नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर, 1940 को अमृतसर के पंजाबी परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम कैलाशवती और पिता का नाम चेतराम खरबंदा था। उन्होंने 1976 में नम्रता चंचल से विवाह किया। उनके दो बेटे और एक बेटी है। अपनी माता की वजह से नरेंद्र चंचल की भजनों में रुचि बढ़ी थी। उन्होंने बचपन से ही अपनी मां को माता रानी के भजन गाते सुना था। नरेंद्र चंचल अपनी पहली गुरु अपनी मां को ही मानते थे। इसके बाद उन्होंने अमृतसर के प्रेम त्रिखा जी से संगीत सीखा। फिर वह भजन गाने लगे। नरेंद्र चंचल ने 'मिडनाइट सिंगर' नामक एक बायोग्राफी भी जारी की, जो उनके जीवन, संघर्षों और कठिनाइयों को बताती है। नरेंद्र चंचल ने यूं तो फिल्मों में ज्यादा गाने नहीं गाए लेकिन जितने भी गाने उन्होंने गाए, वह आज भी पसंद किए जाते हैं. फिल्मी गानों के अलावा नरेंद्र चंचल ने अपने भजनों से लंबे समय तक लाखों लोगों को भक्ति रस से सराबोर किया.

फिल्मों में ब्रेक मिलने की कहानी है बड़ी रोचक ,कागज के टुकड़े ने फिल्मों में ब्रेक दिलवा दिया

एक बार नरेंद्र चंचल ने बताया था कि 1970 के दशक में एक ग्रुप के साथ मिलकर वह अलग-अलग शहरों में प्रोग्राम करते थे. इसी दौरान उन्हें ऐसे ही एक कार्यक्रम में मुंबई गए . उससे कुछ दिन पहले ही वह अमृतसर स्थित अपने घर पर एक दुकान से पकौड़े लेकर जा रहे थे. जिस कागज के टुकड़े पर पकौड़े रखे थे, उसमें मशहूर सूफी गायक बुल्ले शाह की कुछ पंक्तियां लिखी हुईं थी. नरेंद्र चंचल को ये पंक्तियां बहुत पसंद आयीं और मुंबई के शो में उन्होंने इन्हीं पंक्तियों को ही गा दिया .यहीं से नरेंद्र की किस्मत बदल गई , जिस शो में नरेंद्र चंचल ने बुल्ले शाह की यह पंक्तियां सुनायी, उस शो में राज कपूर भी मौजूद थे. राज कपूर उस वक्त बॉबी फिल्म बना रहे थे और उनको फिल्म के लिए सूफियाना आवाज की तलाश थी. जब राज कपूर ने शो में नरेंद्र चंचल को बुल्ले शाह की पंक्तियां गाते सुना तो वह बहुत खुश हुए और उन्होंने शो के बाद नरेंद्र चंचल को गले लगाकर बधाई दी थी और इसके बाद ही बॉबी फिल्म के गीत के लिए नरेंद्र चंचल का नाम फाइनल हो गया था.

माता की भजनों ने लोकप्रियता के शिखर पर बैठा दिया

नरेंद्र चंचल पिछले कई दशकों से कीर्तन और जगरातों की दुनिया में सक्रिय थे। उन्होंने राज कपूर की फिल्म 'बॉबी' में 'बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो' गाना गाया। ये गाना आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इस गाने से उन्हें पहचान मिली और बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड भी मिला नरेंद्र चंचल ने 1974 में 'बेनाम' फिल्म में 'मैं बेनाम हो गया' गीत गाया। 1974 में ही उन्होंने 'रोटी कपड़ा और मकान' में 'बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई' गाने को आवाज दी , ये गीत भी बहुत ज्यादा फेमस हुआ फिल्म 'आशा' (1980) में नरेंद्र चंचल ने 'तूने मुझे बुलाया' गीत गाया, जो काफी हिट हुआ था। इसके बाद 1983 में फिल्म 'अवतार' के लिए उन्होंने भजन 'चलो बुलावा आया है' गाया। ये शबाना आज़मी और राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था। यह गाना भी बेहद लोकप्रिय हुआ। इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। इसके अलावा उन्होंने 1985 में फिल्म 'काला सूरज' के लिए 'दो घूंट पिला दे' और 1994 में फिल्म 'अनजाने' के लिए 'हुए हैं कुछ ऐसे वो हमसे पराए' गीत गाया।

जब नरेंद्र को एक बार अहंकार हो गया तो माता ने कैसे ठीक किया

हर साल जाते थे वैष्णों देवी मंदिर

नरेंद्र चंचल के बारे में कहा जाता है कि वह हर साल वैष्णों देवी मंदिर जाते थे और साल के आखिरी दिन वहां परफॉर्म भी करते थे.उनको सुनने बहुत दुनिया इकठी होती थी , लेकिन वहां से पैसे नहीं मिलते थे , एक किस्सा साझा करते हुए उन्होंने बताया था दरअसल फिल्मों में गीत मिलने के बाद नरेंद्र चंचल को अहंकार हो गया था. यह बात खुद नरेंद्र चंचल ने बतायी थी. नरेंद्र चंचल ने बताया कि एक बार उन्हें मंदिर में भजन गाने के लिए बुलाया गया लेकिन उन्हें एक कार्यक्रम के सिलसिले में आगरा जाना था. ऐसे में नरेंद्र चंचल ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया और मंदिर में भजन गाने नहीं गए. लेकिन जब वह आगरा पहुंचे तो उन्हें महसूस हुआ कि वह बोल नहीं पा रहे थे. तब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और इसके बाद उन्होंने कभी भी भजन गायन के लिए झूठ नहीं बोलने की बात ठान ली. नरेंद्र चंचल ने बताया कि 2 माह तक वह अपनी आवाज को लेकर परेशान रहे थे लेकिन बाद में वह ठीक हो गए थे.

कोरोना पर भजन

मार्च 2020 में नरेंद्र चंचल का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें वे मां दुर्गा का एक भजन गाते दिखे थे। इसमें उन्होंने कोरोना का भी जिक्र किया था। नरेंद्र चंचल द्वारा जगराते में गाया गया उनका वीडियो लोगों के बीच काफी पॉपुलर हुआ। इसमें उन्होंने गाया कि "डेंगू भी आया और स्वाइन फ्लू भी आया, चिकन गोनिया ने शोर मचाया, कित्थे आया कोरोना?"

मृत्यु

भजन सम्राट नरेंद्र चंचल का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में 22 जनवरी, 2021 को निधन हुआ। वह 80 साल के थे। नरेंद्र चंचल पिछले तीन महीने से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक़, शुक्रवार के दिन दोपहर करीब 12.30 पर उन्होंने अंतिम सांस ली।